संविदा कर्मचारियों को हटाकर नए संविदा कर्मी रखना गलत: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
High court – देशभर में लाखों संविदा कर्मचारी कई वर्षों से सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं। लेकिन अक्सर ऐसा देखा जाता है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद भी उन्हें अचानक हटा दिया जाता है और उनकी जगह नए संविदा कर्मियों की भर्ती कर ली जाती है। इस विषय पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जो सभी संविदा कर्मचारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि किसी पुराने संविदा कर्मचारी को हटाकर उसकी जगह नया संविदा कर्मचारी रखना कानून के खिलाफ है। कर्मचारी को केवल नियमित भर्ती द्वारा ही बदला जा सकता है।
मामला क्या था?
यह मामला राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र यानी NCDC से जुड़ा हुआ था। एक कर्मचारी को वर्ष 2019 में Assistant Director (Entomology) के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था। उसका कार्यकाल हर साल बढ़ाया जाता रहा।
कर्मचारी को कई बार मिला एक्सटेंशन
कर्मचारी का संविदा कार्यकाल लगातार बढ़ाया गया। वह लगभग 6 से 7 वर्षों तक उसी पद पर काम करता रहा। विभाग उसकी सेवाएं लेता रहा और उसके काम पर कोई गंभीर शिकायत भी नहीं थी।
लेकिन अचानक मई 2025 में विभाग ने उसे यह कहकर हटा दिया कि उसका संविदा कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
नया विज्ञापन जारी कर दिया गया
सबसे बड़ी बात यह थी कि कर्मचारी को हटाने के कुछ ही दिनों बाद विभाग ने उसी पद के लिए नया विज्ञापन निकाल दिया। यानी जिस पद पर पुराना कर्मचारी काम कर रहा था, उसी पद पर नए संविदा कर्मचारी की भर्ती की तैयारी शुरू कर दी गई।
यहीं से विवाद शुरू हुआ और मामला कोर्ट पहुंच गया।
कर्मचारी ने क्या कहा?
कर्मचारी ने कोर्ट में कहा कि:
र्कमचारी का कहना था कि विभाग ने उसके काम को कभी खराब नहीं बताया। कोई अनुशासनहीनता या असंतोषजनक प्रदर्शन भी साबित नहीं किया गया।
कर्मचारी ने यह भी कहा कि विभाग केवल उसे हटाकर किसी दूसरे व्यक्ति को संविदा पर रखना चाहता है। यह गलत है और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के खिलाफ है।
विभाग ने क्या दलील दी?
विभाग की तरफ से कहा गया कि:
विभाग ने DOPT के एक पुराने ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया। उसमें कहा गया था कि संविदा की अवधि पांच साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
इसी आधार पर विभाग ने कर्मचारी को हटाने का निर्णय सही बताया।

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High Court ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने विभाग की दलील को गलत माना।
कोर्ट ने कहा कि पांच साल की सीमा किसी एक संविदा अवधि पर लागू होती है, न कि हर साल नवीनीकरण होने वाली नियुक्ति पर।
यदि हर साल नया नवीनीकरण किया जा रहा है, तो उसे पांच साल की सीमा का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का उल्लेख किया।
संविदा कर्मचारी को संविदा कर्मचारी से नहीं बदला जा सकता
कोर्ट ने कहा:
- किसी संविदा कर्मचारी को हटाकर दूसरा संविदा कर्मचारी नहीं रखा जा सकता।
- यदि विभाग को पद भरना है, तो नियमित भर्ती करनी होगी।
- केवल बदलने के उद्देश्य से हटाना मनमाना और गलत है।
विभाग की मंशा पर सवाल उठाया
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
यदि कोई कर्मचारी कई वर्षों तक काम कर रहा है, उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है और फिर उसे हटाकर नया संविदा कर्मचारी रखा जा रहा है, तो यह अनुचित व्यवहार माना जाएगा।
कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा करने से भ्रष्टाचार और पक्षपात को बढ़ावा मिल सकता है।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने विभाग की याचिका खारिज कर दी और कर्मचारी को दोबारा नियुक्त करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि:
- पुराने संविदा कर्मचारी को हटाकर नया संविदा कर्मचारी रखना गलत है।
- विभाग केवल नियमित चयन के माध्यम से ही कर्मचारी बदल सकता है।
- लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मियों को संरक्षण मिलना चाहिए।
इस फैसले का प्रभाव
यह फैसला देशभर के संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब यदि किसी कर्मचारी को केवल इसलिए हटाया जाता है ताकि उसकी जगह दूसरा संविदा कर्मचारी रखा जा सके, तो वह कोर्ट में इस फैसले का सहारा ले सकता है।
इस फैसले के बाद विभिन्न विभागों पर यह दबाव बढ़ सकता है कि वे वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय करें।
एक और बड़ी फैसला – Kya hai Mamla Janiye
क्या लाभ होगा
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने वाला बड़ा निर्णय माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार या विभाग मनमाने तरीके से पुराने संविदा कर्मचारियों को हटाकर नए संविदा कर्मचारी नहीं रख सकते।
यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है जो वर्षों से संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था में काम कर रहे हैं और हमेशा नौकरी जाने के डर में रहते हैं।
